MRP की सही जानकारी न तो उपभोक्ताओं को उपलब्ध होती है और न ही सरकार को। : एमआरपी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का धरना
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Jun 12, 2026
एमआरपी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का धरना
नई दिल्ली, 12 जून। अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की मांग को लेकर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के देशभर से आए कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। धरने में विभिन्न राज्यों से आए उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित लगभग एक हजार लोगों ने भाग लिया।
धरने को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायणभाई शाह ने कहा कि एमआरपी व्यवस्था का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को मनमानी कीमतों से बचाना था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अनेक विसंगतियां दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश उपभोक्ताओं को यह धारणा रहती है कि किसी उत्पाद पर अंकित एमआरपी सरकार द्वारा तय की गई कीमत है, जबकि वास्तविकता यह है कि एमआरपी का निर्धारण उत्पादक कंपनी स्वयं करती है। उत्पादक किस आधार पर मूल्य तय करता है तथा उसमें उत्पादन लागत, वितरण लागत और लाभांश का अनुपात क्या है, इसकी जानकारी न तो उपभोक्ताओं को उपलब्ध होती है और न ही सरकार को।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कई कंपनियां एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग बाजारों में अलग-अलग एमआरपी अंकित कर रही हैं। वहीं "एक के साथ एक मुफ्त" जैसी योजनाओं के माध्यम से भी उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि कई मामलों में उत्पादों की कीमत पहले ही बढ़ाकर इस प्रकार की योजनाएं चलाई जाती हैं।
नारायणभाई शाह ने मांग की कि केंद्र सरकार एमआरपी निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कानून में संशोधन करे तथा ऐसी व्यवस्था लागू करे जिससे किसी भी उत्पाद की उत्पादन लागत, वितरण व्यय और लाभांश की जानकारी उपभोक्ताओं को उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि किसी वस्तु की वास्तविक लागत क्या है और उस पर कितना लाभ जोड़ा गया है।
राष्ट्रीय सचिव जयंतभाई कथिरिया ने बताया कि एमआरपी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर ग्राहक पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रियों के समक्ष भी यह विषय उठाया गया, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का यह धरना सरकार और नीति-निर्माताओं का ध्यान उपभोक्ताओं की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास है।
दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष ईश्वर चंद ने कहा कि उपभोक्ता जागरूकता के बिना उनके अधिकारों की रक्षा संभव नहीं है। इसलिए ग्राहक पंचायत अब देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाएगी और आम नागरिकों को एमआरपी व्यवस्था की वास्तविकताओं से अवगत कराएगी। उन्होंने कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता और मूल्य निर्धारण संबंधी जानकारी प्राप्त करना प्रत्येक उपभोक्ता का अधिकार है।
प्रदेश सचिव बंटी चौरासिया ने कहा कि संगठन उत्पादन लागत, वितरण लागत एवं लाभांश की जानकारी उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने की मांग को लेकर घर-घर जनजागरण अभियान चलाएगा। विशेष रूप से दवाओं की कीमतों में पाए जाने वाले भारी अंतर के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शी मूल्य निर्धारण व्यवस्था न केवल उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करेगी, बल्कि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, विश्वास और जवाबदेही को भी बढ़ावा देगी।
धरने में राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायणभाई शाह, राष्ट्रीय सचिव जयंत कथिरिया, राष्ट्रीय सह-सचिव विवेकानंद, राष्ट्रीय पदाधिकारी मुकेश त्यागी एवं शैलेन्द्र दुबे, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर चंद, प्रदेश सचिव बंटी चौरासिया, उपाध्यक्ष बृजमोहन गर्ग, निर्मल लवानिया, सह सचिव अनुज चौधरी, मुकेश मिश्रा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रदीप बंसल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री नवीन जैन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजबीर सोलंकी, कार्यकारिणी सदस्य बिजेन्द्र शर्मा, मोहनजीत कौर, कपिल मोगा, आशा शुक्ला, अनिल अग्रवाल, संगीता शर्मा, मुकेश जैन, धर्मेश गौड़ सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


धरने के माध्यम से अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने केंद्र सरकार से एमआरपी व्यवस्था में व्यापक सुधार, मूल्य निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा उपभोक्ताओं को उत्पादों की लागत संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कानूनी प्रावधान करने की मांग की।
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