होर्डिंग पर्यावरण, संगीत और नवाचार के संगम का उत्कृष्ट उदाहरण : ताजमहल चाय का अनूठा ‘Megh Santoor’ होर्डिंग — इको-फ्रेंडली नवाचार को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Jul 9, 2025
📰 विशेष समाचार
विजयवाड़ा में ताजमहल चाय का अनूठा ‘Megh Santoor’ होर्डिंग — इको-फ्रेंडली नवाचार को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
विजयवाड़ा,
भारत में चाय और संगीत की संवेदनशील धरोहर को जीवंत करते हुए ब्रुक बॉन्ड ताजमहल चाय ने विजयवाड़ा में एक ऐसा इको-फ्रेंडली होर्डिंग स्थापित किया है, जो बारिश के दौरान भारतीय शास्त्रीय राग “मेघ मल्हार” बजाता है। इस अनूठी रचना को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में “दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण-संवेदनशील बिलबोर्ड” घोषित किया गया है।
🌿 होर्डिंग की विशेषताएं:
नाम: Megh Santoor
स्थान: विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन के पास
आकार: लगभग 2,250 वर्ग फीट (≈209 वर्ग मीटर)
खासियत: बारिश की बूंदें सान्तूर जैसे तारों पर गिरते ही “राग मेघ मल्हार” की धुन बजती है
पर्यावरणीय दृष्टिकोण: ध्वनि, वर्षा और कला का संतुलित मेल जो प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है
🏆 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड:
मान्यता प्राप्त: "Largest Environmentally Interactive Billboard"
मान्यता तिथि: 10 सितंबर 2023
मान्यकरण अधिकारी: स्वप्निल डांगरिकर (Guinness World Records India & APAC)
विकास अवधि: 6 महीने में 50+ कलाकारों और इंजीनियरों द्वारा निर्मित
👥 प्रमुख वक्तव्य:
शिवा कृष्णमूर्ति, प्रमुख – Beverages & Foods, HUL:
“Megh Santoor का रिकॉर्ड मिलना हम सभी के लिए गर्व की बात है। यह संगीत, नवाचार और पर्यावरण के प्रति हमारे समर्पण का प्रतीक है।”
Kainaz Karmakar और Harshad Rajadhyaksha, क्रिएटिव चीफ, Ogilvy India:
“यह होर्डिंग बारिश, क्लासिकल संगीत और तकनीक का एक जीवंत संगम है, जो लोगों को रचनात्मकता से जोड़ता है।”
🎶 सांस्कृतिक महत्व:
राग मेघ मल्हार को भारतीय परंपरा में वर्षा का राग माना जाता है।
यह होर्डिंग न केवल ताजमहल चाय की संगीतमय पहचान को सामने लाता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पर्यावरणीय जागरूकता को भी प्रोत्साहित करता है।
विजयवाड़ा जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर में इसकी स्थापना एक भावनात्मक और सांगीतिक श्रद्धांजलि के रूप में देखी जा रही है।
📌 निष्कर्ष:
ताजमहल चाय का ‘Megh Santoor’ होर्डिंग पर्यावरण, संगीत और नवाचार के संगम का उत्कृष्ट उदाहरण 
है। यह भारत की पारंपरिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ता है और समाज को पर्यावरणीय
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