सोशल मीडिया के इस युग में भी पेशेवर सीमाओं का पालन अनिवार्य : सोशल मीडिया पर कानूनी सेवाओं का विज्ञापन वर्जित: दिल्ली बार काउंसिल की वकीलों को सख्त चेतावनी
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Aug 7, 2025
सोशल मीडिया पर कानूनी सेवाओं का विज्ञापन वर्जित: दिल्ली बार काउंसिल की वकीलों को सख्त चेतावनी
पेशेवर नैतिकता का उल्लंघन करने वालों पर अधिवक्ता अधिनियम की धारा 35 के तहत कार्रवाई की चेतावनी
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025 —
दिल्ली बार काउंसिल ने वकीलों को सोशल मीडिया पर आत्म-प्रचार और कानूनी सेवाओं का विज्ञापन करने के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए औपचारिक चेतावनी जारी की है। काउंसिल ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई भी आचरण पेशेवर नैतिकता और अधिवक्ता की गरिमा के खिलाफ है, जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 36 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
बार काउंसिल के अध्यक्ष श्री सूर्य प्रकाश खत्री द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस में कहा गया है कि हाल के दिनों में वकीलों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर वीडियो, व्यक्तिगत बातचीत, साक्षात्कार और मामलों से जुड़ी तस्वीरें साझा करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। काउंसिल ने इसे "अनैतिक प्रचार" करार देते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यवहार से न केवल पेशे की मर्यादा पर आंच आती है, बल्कि यह अधिवक्ता अधिनियम के नियमों का गंभीर उल्लंघन भी है।
⚖️ नैतिकता और अनुशासन पर सीधा हमला
नोटिस में कहा गया है:
“इस तरह के तरीके स्पष्ट रूप से अनैतिक प्रचार हैं, जो पेशेवर नैतिकता और कानूनी व्यवहार की गरिमा का उल्लंघन करते हैं।”
बार काउंसिल ने "स्वयंभू कानूनी इन्फ्लुएंसर्स" के बढ़ते चलन पर भी चिंता जताई है, जिनमें से कई अनुज्ञापित या योग्य अधिवक्ता भी नहीं हैं, फिर भी वे गंभीर और संवेदनशील कानूनी विषयों पर सार्वजनिक रूप से राय व्यक्त कर रहे हैं। इससे आम जनता को गुमराह करने की आशंका बढ़ जाती है।
📜 कानूनी प्रावधान और कार्रवाई की चेतावनी
काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के आचरण को “गंभीर व्यावसायिक कदाचार” के रूप में देखा जाएगा और इसके लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस धारा के अंतर्गत किसी भी अधिवक्ता का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
📢 सभी वकीलों को तत्काल सामग्री हटाने का निर्देश
नोटिस के अंत में कड़ा संदेश देते हुए कहा गया है:
“यह निर्देश दिया जाता है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय सभी अधिवक्ता तत्काल अपनी इस प्रकार की सामग्री हटा लें, अन्यथा उनके विरुद्ध व्यक्तिगत स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी।”
🛑 नैतिकता और गरिमा की रक्षा का संकल्प
दिल्ली बार काउंसिल का यह कदम भारतीय न्याय व्यवस्था की गरिमा, वकालत पेशे की मर्यादा और समाज में वकीलों की भूमिका को संरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत संदेश है। यह अधिवक्ताओं को याद दिलाता है कि सोशल मीडिया के इस युग में भी पेशेवर सीमाओं का पालन अनिवार्य है।
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