सही तरीके से किया गया उपवास लंबे समय तक स्वस्थ : उपवास : आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार लाभ
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Aug 16, 2025
उपवास : आध्यात्मिक, आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार लाभ
नई दिल्ली।
उपवास भारतीय संस्कृति और चिकित्सा परंपराओं में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आत्मिक विकास का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। आधुनिक विज्ञान ने भी इसके अनेक लाभ प्रमाणित किए हैं।
1. आध्यात्मिक दृष्टिकोण
भारतीय परंपरा में एकादशी और अन्य उपवासों को आत्मिक शांति, आत्मज्ञान और मानसिक स्पष्टता के लिए किया जाता है। अनुसंधान बताते हैं कि इससे तनाव कम होता है, मानसिक शांति बढ़ती है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।
2. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में उपवास को शरीर-मन की शुद्धि (प्रशोधन) की प्रक्रिया माना गया है।
पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है।
दोषों (वात, पित्त, कफ) का संतुलन होता है।
चयापचय (metabolism) सुधरता है और शरीर की सफाई होती है।
दीर्घायु और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
3. आधुनिक प्राकृतिक चिकित्सा
विज्ञान के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग से –
इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर होती है।
वजन नियंत्रित रहता है, खासकर पेट की चर्बी में कमी आती है।
ऑटोफैजी (Autophagy) से कोशिकाओं की मरम्मत होती है।
सूजन कम होती है और हृदय स्वास्थ्य सुधरता है।
⚠️ डायबिटीज़ या गंभीर रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को उपवास से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
उपवास समाप्त करने पर क्या खाएं?
आयुर्वेद : हल्की खिचड़ी, मौसमी फल, सब्ज़ी का सूप, त्रिफला या CCF चाय।
आधुनिक पोषण : धीरे-धीरे भोजन की शुरुआत करें, पहले सलाद, सूप या दालें लें। भारी या तैलीय भोजन तुरंत न करें।
दोषानुसार (आयुर्वेद) :
वात : गरम व सुपाच्य भोजन
पित्त : ठंडे व शीतल पेय/सलाद
कफ : हल्के और मसालेदार भोजन
निष्कर्ष
उपवास शरीर और मन दोनों के लिए वरदान है।
आध्यात्मिक रूप से यह आत्मज्ञान और मानसिक शांति देता है।
आयुर्वेद इसे दोष संतुलन और पाचन सुधार का साधन मानता है।
आधुनिक विज्ञान इसे वजन नियंत्रण, कोशिका मरम्मत और हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताता है।
इस प्रकार उपवास हमें अपनी सेहत का “स्वयं डॉक्टर” बनने का अवसर देता है। सही तरीके से किया गया उपवास लंबे समय तक स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि प्रदान कर सकता हैं।
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