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जंगलों और वन्यजीवों के भविष्य को भी सुरक्षित बनाने : वन्यजीव अपराध पर शिकंजा कसने को भारत को मिला नया हथियार – 14 प्रशिक्षित स्निफ़र डॉग स्क्वाड मैदान में उतरने को तैयार

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Aug 11, 2025

वन्यजीव अपराध पर शिकंजा कसने को भारत को मिला नया हथियार – 14 प्रशिक्षित स्निफ़र डॉग स्क्वाड मैदान में उतरने को तैयार

नई दिल्ली, अगस्त 2025भारत में अवैध शिकार और वन्यजीवों के अवैध व्यापार पर कड़ा प्रहार करने के लिए अब 14 नये प्रशिक्षित वन्यजीव स्निफ़र डॉग स्क्वाड तैनात किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्निफ़र डॉग प्रशिक्षण केन्द्र, बेसिक ट्रेनिंग सेंटर, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस फोर्स (NTDC, BTC-ITBP), पंचकुला, हरियाणा में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया (WWF-India) के अग्रणी ‘वन्यजीव स्निफ़र डॉग कार्यक्रम’ के तहत इन डॉग्स और उनके 28 हैंडलर्स को सात महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

यह स्निफ़र डॉग अब राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिज़र्व और अभयारण्यों में तैनात होंगे। इनमें कूनो, पेंच, रणथम्भौर, ताडोबा-अंधारी, कवल, वाल्मीकि, दलमा, पक्के सहित गुरु घासीदास-तमोर पिंगला, अचानकमार, इन्द्रावती और उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व शामिल हैं।

वन्यजीव अपराधों की रोकथाम में स्निफ़र डॉग की भूमिका
इन डॉग्स को शिकारियों का पीछा करने, अवैध शिकार के सबूतों का पता लगाने और वन्यजीव अपराध रोकने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के वरिष्ठ संचालक (जैव विविधता संरक्षण) डॉ. दीपंकर घोष ने बताया कि अवैध वन्यजीव व्यापार एक संगठित आपराधिक गतिविधि बन चुका है, जो बाघ, हाथी, गेंडा, पेंगोलिन, कछुए, पक्षियों और समुद्री प्रजातियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा, “2008 में सिर्फ 2 स्निफ़र डॉग से शुरू हुआ सफर अब 120 से अधिक प्रशिक्षित डॉग्स तक पहुंच चुका है, जिन्होंने विभिन्न राज्यों में अपराध कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केन्द्र के आईजी अशोक नेगी (PMG) ने बताया, “वन्यजीव स्निफ़र डॉग, अपराध की जांच और रोकथाम में गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। ITBP को इस क्षेत्र में दशकों का अनुभव है, और WWF इंडिया के साथ मिलकर यह पहल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।”

अवैध वन्यजीव व्यापार के खतरे
भारत में अवैध वन्यजीव व्यापार में नेवले के बाल, सांपों की खाल, गैंडे के सींग, बाघ-तेंदुए के अंग, हाथी के दांत, कछुए की ढाल, नाभिकस्तूरी, भालू का पित्त, औषधीय पौधे, दुर्लभ लकड़ी और पिंजरे में पालने वाले पक्षियों (जैसे पैराकीट, मैना, मुनिया) की तस्करी शामिल है। यह व्यापार कई प्रजातियों को विलुप्ति के कगार तक पहुंचा चुका है।

मिशन – वन्यजीवों की सुरक्षा
आज आयोजित विदाई समारोह में प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी गईं। WWF इंडिया ने उनके मिशन में पूर्ण सहयोग का वचन दिया। यह पहल न केवल भारत के वन्यजीव संरक्षण कानूनों को सशक्त करेगी, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों के भविष्य को भी सुरक्षित बनाएगी।

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