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: बीमा पॉलिसी लेते समय सच बताएं न छिपाएं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग

लोग अक्सर अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए महंगी से महंगी जीवन बीमा पॉलिसी लेते हैं, ताकि उनके ना रहने पर परिवार परेशान न हो। लेकिन इसमें छोटी सी लापरवाही आपके सपने पर पानी फेर सकती है। चेन्नई में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाते हुए 2 करोड़ की  नौ जीवन बीमा पॉलिसी ली। लेकिन, उसने स्मोकिंग का जिक्र बीमा पॉलिसी में नहीं किया। पॉलिसी लेने वाले की जब  असमय मौत हो गई तो कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के जस्टिस अपशाही की पीठ ने कंपनी के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा की पॉलिसी लेते समय बीमा कंपनी को हर छोटी बात का जिक्र करना जरूरी है । छिपाते हैं तो वह पॉलिसी धारक और बीमा कंपनी के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना जाएगा।

यह है मामला: दो बातें छिपाई थी

चेन्नई के के ललित जैन ने 20 अप्रैल से 20 जून 2009 के बीच दो करोड़ की 9 बीमा पॉलिसी ली। ललित ने मेडिकल रिपोर्ट में 15 साल पहले हुई सर्जरी का जिक्र किया, लेकिन यह नहीं बताया कि वह सिगरेट पीते हैं और कभी-कभार शराब भी हो जाती है । पॉलिसी लेने के 5-6 महीने बाद ललित की हार्ट अटैक से मौत हो गई कंपनी ने जांच कराई तो पता चला कि वे सिगरेट शराब पीते थे।

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