कानूनी सुझाव बॉक्स — माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार : पिता की संपत्ति पर बेटे का कोई स्वाभाविक अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Aug 8, 2025
पिता की संपत्ति पर बेटे का कोई स्वाभाविक अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट किया है कि माता-पिता की मेहनत और स्वयं की कमाई से खरीदी गई संपत्ति पर बेटे का कोई कानूनी हक नहीं है। बेटा, चाहे विवाहित हो या अविवाहित, केवल माता-पिता की अनुमति और दया पर ही उस घर में रह सकता है।
जस्टिस प्रतिभा रानी की एकल पीठ ने यह फैसला एक बुजुर्ग दंपति द्वारा अपने बेटे और बहू को घर से बाहर करने के मामले में सुनाया। दंपति ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उनके संबंध बिगड़ जाने के बाद भी बेटा-बहू ज़बरन घर में रह रहे हैं, जबकि घर उनकी स्वयं की कमाई से खरीदी गई है।
निचली अदालत पहले ही माता-पिता के पक्ष में आदेश दे चुकी थी, जिसके खिलाफ बेटे और बहू ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा—
बेटे का माता-पिता के घर में रहना कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि केवल अनुमति-आधारित सुविधा है।
संबंध बिगड़ने के बाद माता-पिता पर बेटे का बोझ ढोने की कोई बाध्यता नहीं है।
संपत्ति अगर माता-पिता ने अपनी कमाई से ली है, तो वे यह तय करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं कि उसमें कौन रहेगा और कौन नहीं।
अदालत के इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि बुजुर्गों के सम्मान और संपत्ति पर उनका पूर्ण अधिकार कानून द्वारा संरक्षित है, और पारिवारिक संबंध बिगड़ने पर वे अपनी इच्छानुसार घर खाली करवा सकते हैं।
🔹 कानूनी सुझाव बॉक्स — माता-पिता की संपत्ति पर अधिकार
स्वयं अर्जित संपत्ति (Self-acquired Property)
अगर माता-पिता ने अपनी कमाई से संपत्ति खरीदी है, तो बेटा-बेटी, बहू-दामाद सहित किसी का उस पर स्वतः कानूनी अधिकार नहीं।
मालिक यह तय कर सकते हैं कि कौन वहां रहेगा और कब घर खाली करना होगा।
पैतृक संपत्ति (Ancestral Property)
अगर संपत्ति पैतृक है (चार पीढ़ियों से चली आ रही हो), तो बेटों और बेटियों का जन्म से हिस्सा होता है, जिसे माता-पिता अकेले बेच या किसी को देने का अधिकार नहीं रखते।
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार
Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत माता-पिता बच्चों से खर्चा मांग सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें घर से निकालने का आदेश भी दिला सकते हैं।
व्यवहार आधारित अधिकार
केवल माता-पिता की अनुमति से रहना अस्थायी सुविधा है, यह स्थायी अधिकार नहीं।
संबंध बिगड़ने पर अनुमति तुरंत समाप्त हो सकती है।
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