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हेमन्त रावत संगठन मंत्री स्वदेशी जागरण मंच भोपाल : गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति के निर्वाहन की एक कड़ी है

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Mar 29, 2025

गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति के निर्वाहन की एक कड़ी है

बचपन में जब मम्मी कहती थी कि आज नए कपड़े पहनेंगे तो हमेशा पूछता था ऐसा क्यों तो वह कहती थी कि यह हमारा नया साल है कपड़े पहन तो लेते थे लेकिन बात कुछ हजम नहीं होती थी फिर भी पूजा करके दिन की शुरुआत होती थी नवरात्रि प्रारंभ होती थी लेकिन यह समझ नहीं आता था कि यह चैत्र वैशाख की नवदुर्गा और क्वांर की नवदुर्गा क्या होती है और क्या होता है नव संवत्सर? जैसे-जैसे बड़ा होता गया तो तर्क और भी बढ़ गए अंग्रेजी कैलेंडर और पंचांग में अंतर क्यों है लेकिन 11वीं और 12 वीं में पढ़ने के दौरान विद्यार्थी को केवल यह कहा जाता है कि पढ़ाई पर ध्यान दो, क्या करोगे सब चीजें जानकर! स्कूल में इतना कुछ बताया नहीं जाता था कि गुड़ी पड़वा क्यों और कब से? मुझे लगता है कि यह हालत सिर्फ मेरी ही नहीं थी बल्कि मेरे साथियों, सीनियर और जूनियर की भी रही होंगी!

समय आगे बढ़ता रहा मैं भी गुड़ी पड़वा को जानने लगा अखबारों में संपादकीय से जाना कि क्या महत्व है गुड़ी पड़वा का! आज अपने इस लेख के माध्यम से मैं बताना चाहता हूं कि गुड़ी पड़वा सिर्फ एक त्यौहार नहीं जो चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है बल्कि यह भारतीय नववर्ष और भारतीय संस्कृति के निर्वहन की एक कड़ी भी है !

तर्क पूर्ण दृष्टि से देखें तो ब्रह्मा जी द्वारा इस दिन सृष्टि की रचना की और इसी दिन से नवरात्रि का प्रारंभ हुआ नवरात्रि के नौवें दिन रामनवमी मनाई जाती है, बाली का वध करके भगवान श्री राम ने विजय पताका को लहराया! ऐतिहासिक दृष्टि से राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने संपूर्ण कर चुकाकर विक्रम संवत का प्रारंभ किया जो कि वर्तमान वर्ष में 57 जोड़कर निकाला जाता है जैसे 2025 +57 = 2082 विक्रम संवत ! प्राकृतिक रूप से संपूर्ण प्रकृति नए रूप में हरी भरी दिखाई देती है, 23मार्च के बाद सूर्य का उत्तरी गोलार्ध में प्रारंभ करने पर नई उर्जा मिलने से पौधों में नई कलियां खिलने लगती हैं! आर्थिक रूप से फसलों के पक जाने पर कृषक अपने उत्पादन का मूल्य प्राप्त करके आर्थिक रूप से सशक्त हो जाता है साथ ही वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा अप्रैल से मार्च तक चलता है ! ग्रहों की दिशानुसार संवत्सर जिस दिन से शुरू होता है उस दिन जो वार होता है उसी ग्रह के स्वामी को इस वर्ष का राजा माना जाता है जैसे 2082 विक्रम संवत का प्रथम दिन रविवार से प्रारंभ हो रहा है तो इस वर्ष राजा ओर मंत्री सूर्यदेव होंगे !

मैंने पाया कि सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक ऐतिहासिक दृष्टि से यह माह तक पूर्ण रूप से नववर्ष है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज भारतीय संस्कृति की इस कड़ी का बुरी तरह से विघटन हो चुका है मुझे जानकर दुख हुआ कि जब हमने 80 स्कूल के लगभग 5000 स्कूली बच्चों से बात की तो सिर्फ 200 बच्चों को जानकारी है कि क्या है गुड़ी पड़वा और युवा तो जानकर भी इसे अनदेखा कर देता है क्योंकि इसमें ना तो अंग्रेजी नववर्ष की तरह इंजॉय करने को मिलता है नहीं शराब पीने को और ना ही रात भर डीजे बजा कर सड़कों के लोगों में डांस करने को हालांकि कुछ युवाओं को इसके बारे में जानकारी भी नहीं होती और युवा तर्क भी कर देता है कि क्यों मनाए !

लेकिन अब आशा करता हूं कि मैं अपने इस लेख के माध्यम से युवाओं के समक्ष तर्क प्रस्तुत कर रहा हूं तो उसे समझो विचार करो साथ ही सहमत हो तो विश्व गुरु कहलाने वाले भारत की संस्कृति के पुनर्सथापना की एक कड़ी को मनाना प्रारंभ करें !

मेरा का मानना है कि आज से 100 वर्ष पहले प्रकृति का विघटन कर उसका परिणाम आज भोग रहे हैं उसी प्रकार आज अपनी संस्कृति की रक्षा और उसके पहलू को नहीं समझेंगे और अपने परिवार के सदस्यों बच्चों को संस्कृति साझा नहीं करेंगे तो आगामी कुछ दशकों में पर्यावरण बचाओ की तरह विभिन्न सामाजिक समस्याओं से ग्रसित होने पर सांस्कृतिक विघटन जैसे मुद्दे पर विभिन्न प्रकार के बचाव की मुहीम प्रारंभ करनी पड़ सकती है !

अंततः यही कहना चाहूंगा कि अपनी संस्कृति को बचाने के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ नववर्ष विधि विधान पूर्वक मनाएं! आप सभी को भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

हेमन्त रावत

(संगठन मंत्री स्वदेशी जागरण मंच भोपाल)

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