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भारतीय संस्कृति, इतिहास और मूल्यों के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्ष प्रतिपदा का विशेष उत्सव: एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Mar 29, 2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वर्ष प्रतिपदा का विशेष उत्सव: एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध संगठन है। संघ छह प्रमुख उत्सवों को विशेष रूप से मनाता है, जिनमें से 'वर्ष प्रतिपदा' या हिंदू नववर्ष का प्रथम स्थान है यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 30 मार्च 2025 को पड़ रहा है।

वर्ष प्रतिपदा का महत्व:

वर्ष प्रतिपदा को हिंदू पंचांग के अनुसार नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसके अलावा, इसी तिथि पर भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ था, जो इस दिन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। आरएसएस के लिए यह दिन विशेष इसलिए भी है क्योंकि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म भी वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था।

आरएसएस द्वारा वर्ष प्रतिपदा का आयोजन:

आरएसएस की विभिन्न शाखाओं में वर्ष प्रतिपदा उत्सव पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में एकत्र होकर संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार को स्मरण करते हैं और 'आद्य सरसंघचालक प्रणाम' करते हैं। यह प्रणाम वर्ष में केवल एक बार, इसी दिन किया जाता है। इसके पश्चात एकल गीत, अवतरण एवं बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और पथ संचलन:

विभिन्न स्थानों पर आरएसएस की शाखाओं द्वारा नववर्ष प्रतिपदा के अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उदाहरण के लिए, आगरा में संघ के स्वयंसेवकों ने वर्ष प्रतिपदा का उत्सव पारंपरिक रूप से मनाया और प्रमुख मार्गों पर पथ संचलन किया। इसी प्रकार, मेरठ में 28 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में 5000 से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जहां संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का स्मरण किया गया और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

समाज में जागरूकता और एकता का संदेश:

आरएसएस के अनुसार, इन उत्सवों का उद्देश्य समाज में राष्ट्रीयता की भावना को आत्मसात करना, महापुरुषों के योगदान को याद करना और समाज में जागरूकता लाना है। वर्ष प्रतिपदा के माध्यम से संघ समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने और भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करने का प्रयास करता है।

निष्कर्ष:

वर्ष प्रतिपदा का उत्सव न केवल नववर्ष का स्वागत है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, इतिहास और मूल्यों के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा इस दिन का विशेष आयोजन समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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