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काउंसिल को एमआरपी से कम मूल्य पर बिक्री या छूट रोकने का अधिकार नहीं : मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल के आदेश पर विवाद – उपभोक्ता हितों पर बड़ा सवाल

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Jul 28, 2025


मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल के आदेश पर विवाद – उपभोक्ता हितों पर बड़ा सवाल

भोपाल, 28 जुलाई 2025
मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा 25 जुलाई 2025 को जारी सार्वजनिक सूचना (क्रमांक एम.पी.पी.सी./2025/345) के खिलाफ उपभोक्ता संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। इस आदेश में पंजीकृत फार्मासिस्टों और मेडिकल स्टोर्स को दवाओं पर किसी भी प्रकार की छूट या रियायत का प्रचार-प्रसार रोकने का निर्देश दिया गया है।

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, भोपाल महानगर ने इसे उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायियों के खिलाफ बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है। संगठन ने फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संजय कुमार जैन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और कहा:

  1. उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन:
    उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार, मूल्य प्रतिस्पर्धा और छूट उपभोक्ताओं का अधिकार है। मेडिकल स्टोर्स द्वारा दी जाने वाली छूट (कई दवाओं पर 10% से 70% तक) से मरीजों को राहत मिलती है।

  2. काउंसिल की कानूनी सीमा:
    काउंसिल को एमआरपी से कम मूल्य पर बिक्री या छूट रोकने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के पास है, न कि फार्मेसी काउंसिल के।

  3. प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर असर:
    छूट और प्रतिस्पर्धा खत्म होने से मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा और छोटे दुकानदार प्रभावित होंगे।

चर्चा के दौरान अध्यक्ष संजय कुमार जैन ने दावा किया कि "यह आदेश छह अन्य राज्यों में लागू है, इसलिए मध्यप्रदेश में भी जारी किया गया", इस पर जैन जी से पूछने पर कि यह आदेश मरीज/ ग्राहक के हित या जनहित में कैसे हैं , तो उनका कहना कि इससे दवाई की कीमत कम होगी और कंपनी सही कीमत पर अच्छी दवाई बनायेगी। कैसे पूछने पर बता नहीं रहें।

और अन्य राज्यों या किसी न्यायालय के आदेश की प्रति या प्रमाण नहीं दिखाया। साथ ही, काउंसिल अध्यक्ष ने कहा कि “इस आदेश पर दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे, केवल नोटिस जारी करना उद्देश्य है।”

ग्राहक पंचायत ने इसे कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर और उपभोक्ता-विरोधी कदम बताते हुए कहा कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो संगठन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत कानूनी कार्रवाई करेगा।

(नोट, फार्मेसी काउंसिल अध्यक्ष किसी भी मिलने वाले आगंतुकों, फार्मेसी पंजीयन हेतु आए लोगों, नवीनीकरण कराने आए लोगो के मोबाईल कमरे से बाहर बैठे कर्मचारी के पास रखना अनिवार्य कर रखा है ? मौखिक बोल कर)

विशेषज्ञों के अनुसार,

  • दवा मूल्य नियंत्रण और छूट का निर्धारण NPPA (नेशनल प्राइस अथॉरिटी) करती है।

  • राज्य फार्मेसी काउंसिल का कार्य पंजीकरण, लाइसेंसिंग और नैतिक मानकों की निगरानी तक सीमित है।

  • छूट रोकने का आदेश काउंसिल के अधिकार क्षेत्र से बाहर माना जा सकता है।

यह विवाद अब उपभोक्ता अधिकार और राज्य काउंसिल की शक्तियों के बीच कानूनी टकराव का रूप ले सकता है।


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