स्कूल शिक्षा में 21वीं सदी के कौशल जैसे क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या-समाधा : सीबीएसई 9वीं में 2026-27 से ओपन बुक एसेसमेंट — रटने की जगह समझ पर जोर
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Aug 11, 2025
सीबीएसई 9वीं में 2026-27 से ओपन बुक एसेसमेंट — रटने की जगह समझ पर जोर
भास्कर न्यूज़ | नई दिल्ली
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए ओपन बुक एसेसमेंट (OBA) लागू करने का निर्णय लिया है। यह ऐतिहासिक बदलाव जून 2025 में हुई बोर्ड की शासी निकाय की बैठक में मंजूर किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में रटने की प्रवृत्ति कम करना और विषय की गहरी समझ विकसित करना है।
क्या है योजना
राष्ट्रीय विद्यालयी शिक्षा पाठ्यक्रम रूपरेखा-2023 (NCF-2023) में सिफारिश की गई थी कि शिक्षा का केंद्र केवल तथ्यों को याद रखना नहीं, बल्कि अवधारणाओं को समझना होना चाहिए। इसी दिशा में CBSE का यह कदम है।
योजना के तहत, हर सत्र में भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की 3 पेन-पेपर परीक्षाएँ नए OBA फॉर्मेट में होंगी।
परीक्षा में विद्यार्थी किताबें या निर्धारित अध्ययन सामग्री साथ ला सकेंगे और प्रश्न हल करने में उनका उपयोग कर पाएंगे।
यह बदलाव पायलट स्टडी के आधार पर लागू किया गया, जिसमें अतिरिक्त सामग्री दिए बिना ही विषयों के बीच अवधारणात्मक जुड़ाव कराया गया।
बच्चों को क्या लाभ
रटने का दबाव कम होगा — विद्यार्थी तथ्यों के बजाय अवधारणाओं, तर्क और विश्लेषण पर ध्यान देंगे।
सोचने-समझने की क्षमता बढ़ेगी — वास्तविक जीवन स्थितियों से जोड़कर पढ़ाई अधिक प्रासंगिक होगी।
आत्मविश्वास में वृद्धि — परीक्षा डर के बजाय सीखने का अवसर बनेगी।
दीर्घकालिक ज्ञान — विषय की समझ पुख्ता होगी, जो आगे की पढ़ाई में सहायक होगी।
नएपन का अभ्यास कैसे होगा
CBSE पायलट चरण में शिक्षकों को OBA प्रश्न-पत्र तैयार करने का प्रशिक्षण देगा।
विद्यालयों में नियमित रूप से ओपन बुक प्रैक्टिस टेस्ट होंगे, ताकि विद्यार्थी नए प्रारूप से सहज हो जाएँ।
पाठ्यक्रम में केस स्टडी, विश्लेषण आधारित प्रश्न और डेटा इंटरप्रिटेशन को अधिक स्थान मिलेगा।
पालकों को क्या लाभ
बच्चों पर रटाई का मानसिक दबाव घटेगा और वे अधिक रचनात्मक सोचेंगे।
घर पर पढ़ाई का माहौल संवादात्मक होगा, क्योंकि विषयों पर चर्चा बढ़ेगी।
मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी — अंक केवल याददाश्त पर नहीं, बल्कि सोच और तर्क पर आधारित होंगे।
विशेषज्ञों की राय को
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत की स्कूल शिक्षा में 21वीं सदी के कौशल जैसे क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या-समाधान और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा। हालांकि, सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण और माता-पिता की सहभागिता अनिवार्य होगी।
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