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जो हमें मिला है, उसे अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुँचाना हमारी साधना हो : "राष्ट्र सेविका समिति" उपाख्य मौसीजी केळकर जी की जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Jul 5, 2025


📰 वं. लक्ष्मीबाई उपाख्य मौसीजी केळकर जी की जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि
📅 आषाढ़ शुक्ल दशमी - 5 जुलाई
✍️ राष्ट्र सेविका समिति – स्त्रीशक्ति का जाग्रत स्वरूप

भोपाल, 5 जुलाईआज आषाढ़ शुक्ल दशमी के पावन अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की आद्य प्रमुख संचालिका, स्वतंत्रता सेनानी व समाजसेविका वं. लक्ष्मीबाई उपाख्य मौसीजी केळकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन व श्रद्धासुमन अर्पित किए जा रहे हैं।

उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और नारी जागरण के लिए समर्पित रहा। वे केवल संगठन की संस्थापक नहीं, बल्कि नारी शक्ति की चेतना का प्रतीक बनकर उभरीं। भारत की स्वतंत्रता के आंदोलन में जहाँ पुरुषों की भूमिका को व्यापक रूप से जाना गया, वहीं मौसीजी जैसी वीरांगनाओं ने समाज की चुप्पी तोड़कर राष्ट्र निर्माण में स्त्रियों की निर्णायक भूमिका को सामने लाया।


👑 जीवन परिचय एवं प्रेरणास्रोत

  • जन्म: 6 जुलाई 1905, नागपुर

  • मूल नाम: कमल दाते

  • विवाह: सुप्रसिद्ध अधिवक्ता पुरुषोत्तम राव केळकर से, मात्र 14 वर्ष की आयु में

  • विधवा: 1932 में पति का निधन, तब उनकी आयु मात्र 27 वर्ष थी

परिवार में बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण था। स्वदेशी आंदोलन में भाग लिया, चरखा केंद्र की स्थापना की, तथा दलित समाज की महिलाओं को भी सामाजिक गतिविधियों में सहभागी बनाया।


🚩 राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना: 1936, वर्धा (महाराष्ट्र)

डा. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रेरणा से लक्ष्मीबाई केळकर जी ने महिलाओं के लिए समानांतर संगठन की नींव रखी — "राष्ट्र सेविका समिति"।
यह संगठन भारतीय स्त्रियों के जीवन में संगठन, सेवा और संस्कार का त्रिवेणी संगम बनकर उभरा।

“यदि राष्ट्र पराधीन है तो समाज स्वतंत्र कैसे हो सकता है?” — लक्ष्मीबाई केळकर


✨ मौसीजी का अमूल्य योगदान

  • नारी को राष्ट्र निर्माता के रूप में प्रतिष्ठित करना

  • भारतीय संस्कृति पर आधारित नारीशक्ति की पुनर्स्थापना

  • सेवा, संगठन और संस्कार के माध्यम से नारी में आत्मविश्वास का संचार

  • बाल मंदिर, योग केंद्र, छात्रावास व भजन मंडलियों की स्थापना

उन्होंने न केवल सामाजिक सेवा की, बल्कि विभाजन काल में सिंध में रहकर हिंदू परिवारों की रक्षा की, और सुरक्षित भारत पहुँचाने का कार्य भी किया।


🌍 समिति का राष्ट्रीय और वैश्विक स्वरूप

  • भारतवर्ष में 5000 से अधिक शाखाएँ

  • विदेशों में: अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया आदि में सक्रिय कार्य

  • प्रचारिकाएं व विस्तारिकाएं नारी जागरण की वाहक बनीं

  • प्रत्येक वर्ष प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से बौद्धिक, शारीरिक और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण

  • समिति का अपना गणवेश, कार्यपद्धति और आचार संहिता


🌿 श्रद्धास्थलों के संरक्षण का विचार

राष्ट्र सेविका समिति मानती है कि केवल मंदिर ही नहीं, हमारे ऐतिहासिक स्थल, नदियाँ, धर्मपीठ, तीर्थक्षेत्र भी श्रद्धा के केन्द्र हैं।
इनका पावित्र्य, स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखना केवल सरकार का ही नहीं, समाज का भी कर्तव्य है।

🔍 जानकारी के प्रमुख स्रोत:

  • इतिहास ग्रंथ, स्थानीय आख्यान

  • पुरातत्व विभाग के अभिलेख

  • नदी विकास प्राधिकरण, तीर्थ ट्रस्ट

  • जनश्रुतियाँ और लोकमानस की श्रद्धा


📌 संदेश

"हम केवल दर्शक नहीं, उत्तरदायी संतान हैं। जो हमें मिला है, उसे अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुँचाना हमारी साधना होनी चाहिए।"
– वं. लक्ष्मीबाई केळकर


🙏 नारी शक्ति के पुनरुत्थान की प्रेरणा

आज, जब भारत विश्वमंच पर "वसुधैव कुटुम्बकम्" के भाव के साथ आगे बढ़ रहा है, तब मौसीजी के विचार और कार्य और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनका जीवन आज की पीढ़ी को यह संदेश देता है कि संगठित नारी शक्ति ही संस्कृति, समाज और राष्ट्र की वास्तविक धारक होती है।

🚩 राष्ट्र सेविका समिति
📍 सेवा, संगठन और संस्कार का त्रिविध संगम


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