यात्रा दुर्घटना की व्याख्या को भी ध्यान में रखा गया : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑफिस आने-जाने पर हुई दुर्घटना भी ‘ड्यूटी पर’ मानी जाएगी
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Aug 13, 2025
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑफिस आने-जाने पर हुई दुर्घटना भी ‘ड्यूटी पर’ मानी जाएगी
भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी कार्यालय आने या लौटने के दौरान दुर्घटना का शिकार होता है और उसका सीधा संबंध नौकरी से है, तो इसे भी “ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटना” माना जाएगा और परिवार को मुआवजा मिलेगा।
फैसले का सार
सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 की धारा 3 (“accident arising out of and in the course of employment”) की व्यापक व्याख्या करते हुए कहा कि कार्यस्थल से आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाएँ, यदि परिस्थितियों से स्पष्ट है कि वह नौकरी से जुड़ी यात्रा है, तो मुआवजे के दायरे में आएंगी।
मामला
यह मामला महाराष्ट्र की एक चीनी मिल के चौकीदार, शाहू संपतराव जधावर से जुड़ा है। 22 अप्रैल 2003 को वे सुबह 3 बजे से 11 बजे की शिफ्ट पर ड्यूटी के लिए जा रहे थे। कार्यस्थल से लगभग 5 किलोमीटर पहले सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
श्रमिक क्षतिपूर्ति आयुक्त ने मृतक के परिवार को ₹3,26,140 मुआवजा और ब्याज देने का आदेश दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना कार्यस्थल के बाहर हुई, इसलिए मुआवजा नहीं मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि नौकरी से संबंधित यात्रा भी ड्यूटी का हिस्सा है और मुआवजा मिलेगा।
कानूनी आधार
कोर्ट ने “doctrine of notional extension” लागू करते हुए कहा कि कर्मचारी की नौकरी केवल कार्यस्थल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। शिफ्ट में समय पर शामिल होने के लिए यात्रा करना भी रोजगार का हिस्सा है।
साथ ही, Employees’ State Insurance Act, 1948 की धारा 51E में दी गई यात्रा दुर्घटना की व्याख्या को भी ध्यान में रखा गया।
फैसले का महत्व
कर्मचारियों और परिवार को राहत: अब ऑफिस आने-जाने के दौरान हुई दुर्घटना के लिए भी मुआवजा संभव।
निजी और सरकारी संस्थानों पर असर: बीमा पॉलिसी और सुरक्षा नियमों में यात्रा जोखिम भी जोड़े जाएंगे।
कानूनी मिसाल: भविष्य में ऐसे मामलों में न्याय सुनिश्चित होगा।
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