जीवन एक जीवंत आदर्श था, जो संघ-संस्कारों, सेवा, नारीशक्ति और राष्ट्र : राष्ट्र सेविका समिति की चतुर्थ प्रमुख संचालिका वं. प्रमिलाताई जी का 97 वर्ष की आयु में निधन – देहदान एम्स को
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Jul 31, 2025
🕊️ विशेष श्रद्धांजलि समाचार | राष्ट्र सेविका समिति की चतुर्थ प्रमुख संचालिका वं. प्रमिलाताई जी का 97 वर्ष की आयु में निधन – देहदान एम्स को किया जाएगा
📅 दिनांक: 31 जुलाई 2025 | स्थान: देवी अहिल्या मंदिर, इंदौर
आज प्रातः 9:05 बजे, राष्ट्र सेविका समिति की चतुर्थ प्रमुख संचालिका वंदनीय प्रमिलाताई जी का देवी अहिल्या मंदिर, इंदौर में 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्व-प्रकट संकल्प के अनुसार, उनका देहदान 1 अगस्त 2025 को प्रातः 8 बजे एम्स (AIIMS) को किया जाएगा। आज दिनभर उनके अंतिम दर्शन हेतु तल मंज़िल पर व्यवस्था की गई है।
👣 जीवन परिचय व सेवायात्रा:
वं. प्रमिलाताई का जन्म वर्ष 1928 में हुआ था।
वे वर्ष 1965 से देवी अहिल्या मंदिर परिसर में ही निवास कर रही थीं।
राष्ट्र सेविका समिति की वे चतुर्थ प्रमुख संचालिका रहीं और संगठन के विस्तार में उनका अद्वितीय योगदान रहा।
उन्होंने संघ कार्य की प्रेरणा को नारी चेतना, सेवा और आत्मबल के रूप में परिवर्तित किया।
सहज, गंभीर, तपस्विनी और आत्मनिर्भर जीवन शैली उनकी पहचान रही।
🔖 उनके प्रमुख योगदान:
राष्ट्र सेविका समिति को भारत के कोने-कोने में पहुंचाया, विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में।
महिला नेतृत्व को राष्ट्रीय मंचों पर स्थान दिलाया।
जीवनभर ब्रह्मचारिणी व संयमित जीवन का पालन किया।
समाज में नारी सशक्तिकरण को भारतीय संस्कृति से जोड़कर प्रस्तुत किया।
💬 अंतिम संकल्प: देहदान
वं. प्रमिलाताई ने जीवनभर सेवा और समर्पण का आदर्श प्रस्तुत किया और मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा हेतु देहदान का संकल्प लिया। उनका पार्थिव शरीर 1 अगस्त को एम्स को सौंपा जाएगा, जिससे चिकित्सा क्षेत्र को अनुसंधान व शिक्षा में सहायता मिलेगी।
🪔 श्रद्धांजलि संदेश:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेविका समिति, सामाजिक संगठनों, एवं हजारों स्वयंसेविकाओं ने उनके निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है।
सभी ने एक स्वर में कहा –
“वं. प्रमिलाताई एक युग थीं – उनका जाना विचार, तप और सेवा के एक युग का अवसान है।”
प्रमिलाताई जी का जीवन एक जीवंत आदर्श था, जो संघ-संस्कारों, सेवा, नारीशक्ति और राष्ट्र भक्ति की मिसाल बनकर समाज को दिशा देता रहेगा।
उनका जीवन कर्मयोग, त्याग और संस्कार की अक्षुण्ण प्रेरणा है।
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