बाघ बचेंगे तो जंगल बचेंगे, जंगल बचेंगे तो जीवन बचेगा।" : विश्व बाघ दिवस: बाघों की सुरक्षा और जंगल संरक्षण की दिशा में बड़ा संकल्प
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Jul 29, 2025
विश्व बाघ दिवस: बाघों की सुरक्षा और जंगल संरक्षण की दिशा में बड़ा संकल्प
दिनांक – 29 जुलाई 2025
हर साल 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बाघों की घटती संख्या पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना और उनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना है। बाघ न केवल भारत की पहचान हैं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
भारत, जहां दुनिया के लगभग 75% बाघ पाए जाते हैं, ने 2024 में अपनी बाघ गणना रिपोर्ट में बताया कि देश में अब करीब 3,200 से अधिक बाघ मौजूद हैं। इसके बावजूद शिकार, जंगलों की कटाई और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
सरकार और विभिन्न पर्यावरण संगठनों ने इस दिन विशेष अभियान चलाकर लोगों से अपील की कि:
बाघ और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है।
अवैध शिकार रोकने के लिए सख्त कानून और जन जागरूकता जरूरी है।
बाघ संरक्षण से न केवल वन्यजीव बल्कि जल, वन और जलवायु संतुलन भी सुरक्षित रहता है।
इस अवसर पर कई राज्यों के राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में जागरूकता रैलियां, वृक्षारोपण और स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में बाघों की संख्या और बढ़ सकती है।
संदेश:
"बाघ बचेंगे तो जंगल बचेंगे, जंगल बचेंगे तो जीवन बचेगा।"
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